क्या 1989 का इतिहास दोहराएगा 2019 लोकसभा चुनाव ?

लोकसभा चुनाव 2019 पर यूरीड मीडिया ग्रुप ने एक विस्तृत विश्लेषणात्मक रिपोर्ट बनाई है। रिपोर्ट में 3 पार्ट है।
पार्ट एक-
देश के 543 लोकसभा क्षेत्रों की तुलनात्मक समीक्षा रिपोर्ट है।
पार्ट दो -
उत्तर प्रदेश किसके साथ ?
पार्ट तीन -
उत्तर प्रदेश के 80 संसदीय क्षेत्रों का 1952 से लेकर 2014 तक की चुनावी परिणामों की तुलनात्मक समीक्षा है। समीक्षा में सपा बसपा गठबंधन सहित उन सभी राजनीतिक समीकरणों को शामिल किया गया है जिसके आधार पर 2019 लोकसभा चुनाव में सम्भावित परिणाम हो सकते हैं। देखे विस्तृत रिपोर्ट -

यूरीड सर्वे पार्ट एक-
देश में वर्तमान राजनीतिक माहौल में किसी पार्टी को नहीं मिल रहा है पूर्ण बहुमत। 2019 लोकसभा चुनाव 1989 दोहराने जा रहा है ?





यूरीड सर्वे पार्ट दो

उत्तर प्रदेश किसके साथ ?


यूरीड सर्वे पार्ट तीन
उत्तर प्रदेश के 80 लोकसभा क्षेत्रों का भाजपा एवं गैर भाजपा दलों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्ट

2019 लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों में सरगर्मीं बढ़ गयी हैं। सभी दल चुनाव जीतने के लिए प्रबंधन में जुट गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जुलाई माह में उत्तर प्रदेश में आधा दर्ज़न रैलियां करके अरबो रूपये के विकास कार्यों का शिलान्यास भी किया है। भाजपा केंद्र में बहुमत बरकारार रखने के लिए उत्तर प्रदेश में अपनी पूरी ताक़त लगा दी है क्योकि दिल्ली की सत्ता का रास्ता उत्तर प्रदेश से हो कर गुजरता है। भारतीय जनता पार्टी मोदी के नाम पर एक बार फिर चुनावी बैतरणी पार करना चाहती है लेकिन स्थिति 2014 लोकसभा चुनाव की तरफ अनुकूल नहीं हैं। 2014 में कांग्रेस सरकार के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोप महंगाई सहित तमाम मुद्दों पर जनता देश में बदलाव चाहती थी। जिसका फ़ायदा भारतीय जनता पार्टी को मिला । लेकिन 2019 में स्थितियाँ चुनौती पूर्ण है केंद्र में मोदी के नेतृत्व में 5 साल पूरे होने जा रहे हैं और उत्तर प्रदेश में भी 325 सदस्यों के साथ प्रचंड बहुमत की सरकार और मोदी पर जनता ने 2014, 2017 में भरोसा किया । लेकिन जन अपेक्षाओ पर केंद्र एवं प्रदेश दोनों सरकार खड़ी नहीं उतर पा रही हैं । बेरोजगारी, महगायी, महिला एवं दलित उत्पीड़न, भ्रष्टाचार, सहित तमाम समस्यायें जो पूर्व सरकारों में रहीं वो आज भी बरकार है नोट बंदी GST लागू करने से भी एक वर्ग में नाराजगी है। इस नाराजगी का फ़ायदा गैर भाजपा दल उठाना चाहते है। प्रदेश में सरकार बनने के बाद लोकसभा के तीनो उप चुनाव में मिली सफलता से सपा बसपा कांग्रेस सभी उत्साहित हैं। आपसी मतभेद भुला कर सपा बसपा चुनाव तालमेल की तैयारी में जुटे हैं। कांग्रेस भी सपा बसपा गठबंधन का हिस्सा बनना चाहती है लेकिन सीटों का बँटवारा कैसे और किस आधार पर होगा यही तय करेंगा की भाजपा को कैसी चुनौती दे सकते हैं। जन समस्यायों के आगे राजनीतिक दलों के धार्मिक व जातीय एजेंडे भारी पड़ रहे है। कहने के लिए तो लोकसभा चुनाव विकास के नाम पर लड़ा जा रहा है परन्तु वास्तविकता इसके विपरीत है भाजपा सपा बसपा कांग्रेस सभी चुनाव जीतने के लिए जातीय एवं धार्मिक एजेंडे पर ही कार्य कर रहे हैं। प्रत्याशी के चयन ही जातीय एवं धार्मिक आधार पर हो रहे हैं। पूरा चुनाव भाजपा व गैर भाजपावाद पर ही होने जा रहा है। अभी तक गैर कोंग्रेसवाद के नाम पर विपक्षी एकजुटता होती थी ये पहला अवसर है कि गैर भाजपा वाद पर विपक्ष एक साथ खड़ा है।
मौजूदा राजनीतिक हालात और 2014 चुनाव परिणाम का विश्लेषण करें तो 2019 कैसा होगा और उत्तर प्रदेश किसके साथ रहेगा इसका एक खाखा उभर कर सामने आता हैं। 2014 में उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में 71 सीटें और 42.03 प्रतिशत मत भाजपा को मिले थे। सपा को 22.20 प्रतिशत मत और 5 सीटें बसपा 19.60 प्रतिशत मत पाकर खाता भी नहीं खोल पाई। कांग्रेस 7.5 प्रतिशत मतों के साथ 2 सीट जीतने में सफल रही। जबकि अपना दल 1.0 प्रतिशत मत के साथ कांग्रेस के बराबर 2 सीटें पर जीत हासिल की। चुनाव में सपा की जीत परिवार तक ही सीमित रही। मुलायम सिंह यादव, डिम्पल यादव, तेज़ प्रताप यादव, अक्षय यादव और धर्मेंद्र यादव ही अपनी सीट बचा सके तथा 31 स्थानों पर दूसरे स्थान पर रही। बसपा को सीट नहीं मिली लेकिन बसपा 34 सीटों पर दूसरे नंबर पर रहने में सफल रही। कांग्रेस माँ बेटों के जीत के साथ 6 अन्य स्थनो पर दूसरे नंबर पर रही। अपना दल 2 सीटें जीती जबकि आप पार्टी बनारस में दूसरे स्थान पर रही। भाजपा के इस अप्रत्याशित जीत में बढ़ा हुआ मतदान प्रतिशत भी बहुत ज्यादा फायदेमंद रहा है। अभी तक हुए चुनाव में 2014 में सर्वाधिक 66.44 प्रतिशत मतदान हुआ। इसके पहले इतना मतदान प्रतिशत कभी नहीं रहा। 2009 में मात्र 58.19 और 2004 में 58.7 प्रतिशत मतदान हुए थे। 1977 जनता लहर में भी 60 प्रतिशत मतदान हुए थे।
2019 में गैरभाजपावाद पर बनने वाले सपा बसपा कांग्रेस व अन्य दलों के मत प्रतिशत क्या होंगे इस पर एक तुलनात्मक रिपोर्ट दी जा रही है। प्रत्येक संसदीय क्षेत्र की विस्तृत सर्वे रिपोर्ट भी जल्द ही दी जाएगी -